पूँजीवाद-माओवाद: कुछ नोट्स-१

निर्मल-आनन्द आज कल मेरे दोस्तों को मुझ पर शर्म आने लगी है। मेरी राजनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूछा जा रहा है: तुम्हारी पौलिटिक्स क्या है पार्टनर। मैं उनकी शर्म का समाधान नहीं कर सकता। मैं यह ब्लौग इसलिए नहीं लिखता कि मेरे दोस्तों को मुझ पर शर्म न आए। इसलिए भी नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी
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[15 Apr 2010 00:03 AM]

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