बस एक काम यही.....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन बस एक काम यही बार-बार करता थाभंवर के बीच से दरिया को पार करता थाउसी की पीठ पर उभरे निशान ज़ख्मों केजो हर लड़ाई में पीछे से वार करता थाअजीब शख्स था ख़ुद अलविदा कहा, लेकिनहरेक शाम मेरा इंतज़ार करता थाहवा ने छीन लिया अब जो धूप का जादूनहीं तो पेड़ भी पत्तों से... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[14 Apr 2010 22:25 PM]

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