तुमने जो दे दी मंजूरी
यादों की पुस्तक के खुल कर लगे फ़ड़फ़ड़ाने वे पन्नेजिन पर अंकित, मेरे प्रस्तावों को तुमने दी मंजूरीपाणि ग्रहण के पावन पल की वह मॄदु बेला याद आ गईनयनों की फुलवारी में जब रंग बिरंगे फूल खिले थेमंत्रोच्चार जगाता था जब अनचीन्ही हर एक भावनाभावों का अतिरेक उमड़ता और...
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राकेश खंडेलवाल
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[14 Apr 2010 22:05 PM]



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