हमें बहका न कोई लाया है
हमें बहका न कोई लाया है आये है हम |तेरी बगिया में नया पाया है जनम ||बड़ी बातों को समझने का अभी होश नहींकलियों में अभी फूलों का वो जोश नहींबड़ी शिद्दत से तेरी टहनी पे चटके है हम || तेरी बगिया ....तेरी झोली में कुछ रत्न की दरकार रहीजान क्यों ढुंढती हमको...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[14 Apr 2010 20:00 PM]



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