घिस रही है उधडे रंग के टूटे धागों में..........

साहित्य योग किनारे दीवारों पर लटकता पर्दासामने पड़ी लाल रंग की चटाईयाद दिला रही हैं उसको अपनेबीते कल की जुदाई.....वही रंग है दोनों का जो कभीदेखा था उसने अपने गाँव के बने घर पर......ढलता जा रहा है उसका भी रंग धीरे-धीरेलटकते पर्दों के साथ.....घिस रही है उधडे रंग केटूटे... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[14 Apr 2010 15:22 PM]

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