भाग ल अजमावत हावय

गुरतुर गोठ दिन-रात पोंगा ल, वजावत हावयंघर-घर म जाके, रिरियावत हावंयअईसन छाये हे, चुनावी मऊसमचारो खूंट मनखे, बगरावत हावंयकोन्हों कुछु करंय त झन करंयफेर, लोगन ल आसरा देवावत हावयनान-नान लईका, जंवरिहा, सियानदारू पीरे बन गेहें मितान'नल', 'जांता' अऊ 'पत्ती' छापासब्बो... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

श्रीमती सुधा शर्मा

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[14 Apr 2010 13:36 PM]

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