मयखाने में 'डाकिया डाक लाया....'
लिखने वाले ने लिखा हम क्या लिखें ऐसे गीतों के बारे में । बस देख -सुन कर खुश हो लेते हैं और ब्लॉग -जगत में इन्हें बाँटनें का मकसद अपने हम-ख़याल दोस्तों को ढूंढना होता है । अगर ये गीत आपके दिल को ई-मेल के ज़माने में छू जाता है तो आप-हम हमखयाल हुए न...
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मुनीश ( munish )
nostalgia
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[14 Apr 2010 14:01 PM]



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