हमें भी लोग बुलाते, कविता सुनते और नोट थमाते, ब्‍लॉगर मिलन हम, सारे हिन्‍दी जहान से कर आते (अविनाश वाचस्‍पति)

Avinash Vachaspati अगर धंधा हमारा होताकविता लिखना औरमंच पर सुनाना तोभाग्‍य हमारे इतने सारे खुल जाते।जहां जाते जब भी जातेहिन्‍दी ब्‍लॉगरों से जरूररूबरू बैठ कर बतियाते।खर्चा अपना होता नहींसब मिल बैठते सबसेसबके दिल में हम समातेदिल में अपने सब बसातेअगर कविता सुनाने हमेंमंच पर... [पूरी पोस्ट]
writer अविनाश वाचस्पति

कविता

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[14 Apr 2010 12:36 PM]

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