सीने में सुलगती चिंगारी

अमर 'आकाश' सीने में सुलगती चिंगारी, कल सोला बनकर महकेगी.सच्चाई की खुशबू इक दिन, सारे जग में महकेगी.चाहे जितना जोर लगालो, खुशियों से जलने वालों.सतरंगी आकाश धनुष को देख के धरती चहकेगी.नफ़रत के... [पूरी पोस्ट]
writer AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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[10 Apr 2010 09:10 AM]

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