यूं ही तो नहीं हुआ होगा

पहलू यहां तक मेरा आनाइतने सरंजाम सजानायूं ही तो नहीं हुआ होगाकिसी शाम नाकारा जानकरछोड़ दिया गया होऊंगाइतने बड़े सिर वाला बानर का बच्चाजो मां के पेट से चिपक भी नहीं पाताओह, तब भी इतना ही बड़ा था यह सिरजब शेयर बाजार नहीं बने थेलाला लोग मीडिया नहीं चलाते थेऔर... [पूरी पोस्ट]
writer चंद्रभूषण

कविताएं

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[14 Apr 2010 10:33 AM]

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