जिंदगी और रास्ता...
सब चलते ही तो हैं अपने जीवन मे... और ये पंक्तियाँ बस एक कठिन से जीवन के नाम...किसी रोज चलते हुए,एक ख्याल सा आया,अपने जीवन को मापा,पर सिर्फ एक शुन्य ही पाया.उलझी सी कुछ राहें,कुछ दुर्गम सा सफ़र,अनजानी सी एक मंजिल,हर मोड़ पे एक रोड़ा पाया.कहीं सरल भी था...
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हिमांशु पन्त
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[14 Apr 2010 09:26 AM]



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