गुम सुम सी बैठी रहती हूँ
"गुम सुम सी बैठी रहती हूँ "गुम सुम सी बैठी रहती हूँ।ख़्वाबों को ख्यालों को ,नयनों मे बसाती रहती हूँ ।थक जाते हैं मेरे ये नयन ,पर मैं तो कभी नहीं थकती ।गुम सुम ........................ ।कानों को कभी लगे आहट ,आते हैं होठों पर ये हँसी ।पल भर की ये उम्मीदें...
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Kusum Thakur
कविता
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[14 Apr 2010 09:18 AM]



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