“नानी जी का घर” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
मई महीना आता है और, जब गर्मी बढ़ जाती है।नानी जी के घर की मुझको, बेहद याद सताती है।।तब मैं मम्मी से कहती हूँ, नानी के घर जाना है।नानी के प्यारे हाथों से, आइसक्रीम भी खाना है।।कथा-कहानी मम्मी तुम तो, मुझको नही सुनाती हो।नानी जैसे मीठे...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[14 Apr 2010 07:55 AM]



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