जिन्हें राष्ट्र ने जन्मा वे ही, राष्ट्रपिता कहलाएं

स्वप्नलोक अपना क्या है, तुम कह दो तो, हम तो मान भी जाएं ।पर यह पगला नहीं मानता, दिल को क्या समझाएं ॥देश तरक्की बहुत कर लिया, सर जी ! हमने मानाकिन्तु आज भी सिर पर मानव ढोता है पाखानाअगर न ढोये, शायद बच्चे भूखे ही रह जाएं।पर यह पगला नहीं मानता, दिल को क्या समझाएं... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[14 Apr 2010 07:35 AM]

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