आयेंगे और रह जायेंगे
दिन की रोशनी की आवाज़ कानों में उड़ेलते चेहरे पर फैले पसीने की सनसनाहट का शोर मचाते आते होंगे किसी पर्वत की गहराई से निकलकर किसी आसमान की तराई से न जाने कौन सी गरम हवा वाली शहनाई सेतकरीरों की झंझट का कोई स्टीली-शीट ओढ़े हुए फटे हुए कुर्ते का दाहिना हाथ...
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बालकिशन
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[14 Apr 2010 07:28 AM]



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