माओवाद के शहरी समर्थक अब तो विचार करें - दिवाकर मुक्तिबोध

आवारा बंजारा सिर्फ एक दशक की बात करें। बीते दस सालों में देश में नक्सली हिंसा की अनेक घटनाएं हुई, अनेकों जवान मारे गए, पुलिस अधिकारी भी खेत रहे और न जाने कितने मासूम आदिवासियों की जानें गई लेकिन सबसे ज्यादा विचलित करने वाली घटना दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार के जंगल में... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjeet Tripathi
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[14 Apr 2010 04:11 AM]

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