दिल में बैठा डर कोई था
गमजदा थमी धड़कने, धुंधली उम्मीदें, सोग हैंऔर क्या किसे देखते, अपने ही जैसा हर कोई थारोज रात को लौट के, जाना ही होता है वहांमौत की राहें अजब, वैसे किसी का ना घर कोई थाजब भी बुरा सा कुछ हुआ, वो लफ्ज लब पर आ गयानहीं खुदा सा नहीं कोई, था... दिल में बैठा डर...
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Rajey Sha
गजलनुमा
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[14 Apr 2010 03:52 AM]



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