कुछ लम्हे
---------------------------------हाँथ रख कर मांथे पर ताप क्यों देखते हो मेरी आँखों में देखो भाप की बूंदे उभर आई है ------------------------------------अपनी किस्मत आजमा सकती नई नज़्म गुनगुना सकती एक पल को ही सही शायद मैं मुस्कुरा सकती...
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Sonal Rastogi
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[14 Apr 2010 02:51 AM]



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