कुछ लम्हे

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में ---------------------------------हाँथ रख कर मांथे पर ताप क्यों देखते हो मेरी आँखों में देखो भाप की बूंदे उभर आई है ------------------------------------अपनी किस्मत आजमा सकती नई नज़्म गुनगुना सकती एक पल को ही सही शायद मैं मुस्कुरा सकती... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

क्षणिकाए

views
14
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
6
[14 Apr 2010 02:51 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix