सूरज दादा से रिक्वेस्ट है

स्वप्नलोक मौसम कैसा यह गरमी का,घर से निकल न पायें ।मम्मी के ये नियम कायदे,बिल्कुल हमें न भायें ॥ मन करता है बाहर खेलें, परमीशन जो पायें । गेट खुला मिल जाये तो हम,चुपके बाहर जायें ॥खेलें खूब, दोस्तों के संगमिलकर मौज मनायें ।भूख लगे तो घर आकर बस,आइसक्रीम ही खायें ॥... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[14 Apr 2010 03:31 AM]

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