सही वक़्त पर सही प्रतिक्रिया

A poetess blog मैंने देखाघर से काफी दूरबहुत तेज़ चमक के साथमिट्टी में कुछ झिलमिलता सापर बादल के टुकड़ेजैसे ही सूरज को ढकतेसब शांत हो जाताऔर फिर बादल के हटते हीफिर वही ज़ोरदार चमकजैसे सूरज का कोई टुकड़ाटूट कर गिर गया हो ज़मीन मेंमुझसे रहा ही नहीं गयासोचा जाकर देखूंइस सूरज... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[14 Apr 2010 02:21 AM]

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