सूत न कपास जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा!

अमीर धरती गरीब लोग सूत न कपास जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा!मुहावरा आजकल सुनाई नही पड़ता,कभी स्कूल मे पढाया जाता था।ये याद ललित-अनिल प्रकरण के संदर्भ में।इस मामले में सिर्फ़ दो लोग खामोश रहे एक ललित और दूसरा मैं यानी अनिल।ललित तो अभी भी कुछ कहना नही चाहता और मैं भी,लेकिन जिस तरह... [पूरी पोस्ट]
writer Anil Pusadkar

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[14 Apr 2010 02:04 AM]

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