मोहब्बत .......
देवेश प्रतापमोहब्बत के अहसासों से अधुरा था मै । एक हवा के झोके ने हमें , मोहब्बते दास्ताँ सुनाया॥ अहसासों के सरोवर में मोहब्बत का कमल खिलने लगा ।मै पवन वो नदी बनकर साथ मचलने लगे ॥प्यार कि कस्ती पर हम दोनों सवार होगये ।पतवार फेक कर दुनिया जहाँ से बेपरवाह...
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देवेश प्रताप
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[14 Apr 2010 01:31 AM]



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