कौटिल्य का अर्थशास्त्र-संकटों से सामना करने का उपाय करें (apne sankatmochak swyan bane--kautilya arthshastra)
हुताश्नो जलं व्याधिर्दुभिक्षो मरकस्तया।इति पंवविंधं दैव व्यसनं मानुषं परम्।।हिन्दी में भावार्थ-अग्नि, जल, व्याधि,अकाल तथा मौत यह पांच तो भाग्य से निर्मित होकर मनुष्य को पीडा़ देते हैं पर व्यसन करना उसका निजी दोष है।दैवं पुरुष्कारेण शान्तया चं...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[14 Apr 2010 00:01 AM]



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