प्यार -एक एहसास
कैसे लिखूं मैं तेरे लिए,जबकि मैं जानती हूँकि तुझ तक पहुँचने के बादविचार शून्य हो जाते हैंऔर कल्पनाएँ ........वो तो न जानेकिस ताखे परबैठ जाती हैऔर देखो ...मैं यूँ ही अलसाई हुई सीउसी ताखे पर बैठी हुईदेखती रहती हूँबस देखती रहती हूँकैसे लिखूं मैं तेरे...
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रंजना [रंजू भाटिया]
kavita prem .ehsaas
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[13 Apr 2010 23:19 PM]



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