साहित्य और सत्ता के रिश्ते
उमेश चतुर्वेदीसंतन को सीकरी सों क्या काम... सत्ता और साहित्य के रिश्तों की जब भी चर्चा होती है, करीब साढ़े चार सौ साल पहले लिखी कुंभनदास की ये पंक्तियां बरबस याद आ जाती हैं। अकबर के दौर में जब कुंभनदास ने इन पंक्तियों की रचना की थी, तब के अधिकांश...
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उमेश चतुर्वेदी
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[13 Apr 2010 22:39 PM]



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