राह मिल गई साथ हो गए
राह मिल गई साथ हो गए और सुख का क्या करें ?बांह ले ली हो किसी ने चांदनी क्या करें ?वेदना के तीर पहुंचे भाव की पतवार लेफिर स्वरों की गोते खा ही ले मझधार मेंनवगीत लिखते है पुराने दर्द का हम क्या करें ?जहर खा कर भी सदा अमृत पिलाना चाहतेप्रीत की टुक कर्जदारी...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[13 Apr 2010 21:51 PM]



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