मैं इसके आगे क्या कहूँ ...
हिंदी ब्लोगिंग में जो मैंने पाया ....कैसे कहूँ कि सब ही गंवाया ...वास्तविक जीवन के समानांतर चल रही हिंदी ब्लोगिंग की आभासी दुनिया ....इधर जो माहौल बना हुआ है मन बहुत दुखी और उदास था ... इसी निराशा(अपने स्वाभाव के विपरीत ) के भंवर में डूबते -उतरते एक मेल...
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वाणी गीत
मेल
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[13 Apr 2010 21:31 PM]



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