फिर जन्मने की ख्वाहिश
नीद से लड़ते हुए जब थकी-हारी फिर नीद आ जाती है सपना देखना मेरा तुम्हें जाहिर हो इसलिये बड़बड़ाती हूँ . रक्तपिपासु घूमते है निर्द्वन्द देखकर डर जाती हूँ फिर जन्मने की ख्वाहिश में अक्सर मैं मर जाती हूँ...
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Razia
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[13 Apr 2010 20:20 PM]



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