कुछ मुक्तक
जिंदगी हमसे इस कदर रुठी हैकि हर साँस का हिसाब माँग बैठी हैमोहब्बत हमसे इस कदर रुठी हैकि हर पल के साथ का हिसाब माँग बैठी हैदिल था हमारा एक छोटा साउसमें भी तुम्हारा अक्ष थाजो तुम्हारी साँसों से धड़कता थाआज वही तार-तार है बेजान साक्यों हमसे इतनी परीक्षा ली...
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Manoj Bharti
कविता
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[13 Apr 2010 12:57 PM]



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