सिर्फ मेरी आंखों ने देखी ओबामा-मनमोहन की यह ख़ास मुलाक़ात अज़ीज़ बर्नी
इन्सानी दिमाग़ के उड़ान की ऊंचाई की कोई सीमा नहीं। वह कब क्या सोचने लगे, कल्पना करना कठिन है। इसी तरह ख्वाब की बात भी है जब आप गहरी नींद में डूबे हों तो आपकी आंखें कैसे-कैसे सपने सजा लें, इस पर भी आपका कोई ज़ोर नहीं। कभी-कभी ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हो जाता...
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Aziz Burney
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[13 Apr 2010 12:29 PM]



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