इस भीषण गर्मी में भी नौकरी करनी पड़ती है ?

कवि कोकास कई साल पहले की बात है । ऐसे ही जब ग्रीष्म का आगमन हुआ एक दिन दफ्तर में एक मित्र से बात चल रही थी । वे कहने लगे  “ यार गर्मी के दिनों में दफ्तर जाना बहुत अखरता है ।“ मैने कहा “ क्या करोगे भाई नौकरी तो नौकरी है , करनी ही पड़ेगी । आखिर मौसम को भी... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

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[13 Apr 2010 11:40 AM]

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