परिजात के फूल और श्रीकृष्ण से मेरा कौन-सा रिश्ता है...
परिजात के फूल और...एक दिन की बात है... मैं अपने कमरे में बैठी थी, तभी मेरी स्कूल की सखी संतोष, पूनम और अनु आ गईं और कहने लगीं आज मन्दिर चलते हैं... मैंने कहा क्या बात है? आज कोई विशेष दिन है, क्या वे कहने लगीं मन्दिर के पास मेला जैसा माहौल होता है......
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फ़िरदौस ख़ान
ज़िन्दगी की किताब का एक वर्क़
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[13 Apr 2010 10:43 AM]



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