GULDASTE - E - SHAYARI
उम्मीद की किरणें यही हैं कह रही,रास्तों से हो गयी पहचान है !हम डगर पर चल पड़े है बेझिझक,मंजिलें ये देखकर हैरान है !कल तलक तो पाँव भी बेजान थे,किन्तु अब पूरा सफ़र बेजान है !...
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Babli
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[13 Apr 2010 10:24 AM]



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