रंग-रँगीला : कृष्णकुमार यादव की एक बालकविता

सरस पायस रंग-रँगीला गाल गुलाबी, नाक नुकीली, लंबी टोपी पहन चिढ़ाए। उछले-कूदे, चले मटककर, पहिए पर चढ़ उसे चलाए। रंग-रँगीला बनकर आए, सबके मन को ख़ुश कर जाए। हम सब देख बजाते ताली, जोकर सबको ख़ूब हँसाए। झूला झूले चहक-चहककर, चढ़े सायकिल, तो लहराए। कितना अच्छा है यह... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
12
[13 Apr 2010 09:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix