तीन त्रिवेनियाँ
१-नए किरदार भी मचलते हैंफ़साने पूरी रात जलते हैंतुम्हारे जिक्र से क्या ना हो ?२-चाँद जब फलक से वाबस्ता होचादनी इक हसीन रस्ता होतुम उतर कर ज़मीं पे आ जाना३-ये सूरज जो पूरे दिन यहाँ पे जलता हैसुना है शाम के बाद अमरीका में जलेगाइस चिराग ने भी उम्र भर दहलीज़...
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स्वप्निल कुमार 'आतिश'
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[13 Apr 2010 09:44 AM]



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