नाखून : एक

कस्बे का कवि... कितने भी सलीके से काटे जायेंनाखूनखूबसूरत नहीं होतेखूबसूरत तो सिर्फचेहरे होते हैंलहुलुहान होने से पहलेऔर कई अर्थों मेंलहुलुहान होने के बाद भी.... [पूरी पोस्ट]
writer मणिमोहन
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[13 Apr 2010 06:42 AM]

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