अमृता प्रीतम, यादों के झरोंखों से...

बातें जो छूट गईं लाखों लोगों की भीड़ में किसी को होश न था, सब अपनी अपनी जान बचा कर निकलना चाहते थे, कोई दबेकुचले या मर ही क्यों न जाए किसी को कोई परवाह नहीं। जाने कितने ही बच्चे यतीम हुए, कितनी ही मांगों का सिंदूर उजड़ गया और कितनी ही कोख सूनी हो गई... बात भारत पाक... [पूरी पोस्ट]
writer aneeta

अमृता प्रीतम

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[13 Apr 2010 05:26 AM]

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