इस मातम का कोई नाम नहीं
एक गरीब ने दूसरे गरीब की हत्या कर डाली। पहला हिंसक होकर अपने शोषण का बदला लेना चाहता है। पर अब वह अपने पाक मकसद से भटक चुका है। दूसरा उसे मारना नहीं चाहता। पर हुक्म की तामील करना उसका काम है। उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती है। नक्सलियों ने जो दंतेवाड़ा में...
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चन्दन कुमार
नक्सलवाद
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[13 Apr 2010 00:59 AM]



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