पीले फूल
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती संगीता स्वरुप जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... मैंने यादों के दरख्त पर टांग दिए थे अपनी चाहतों के पीले फूल और देखा करती थी उनको अपनी निर्निमेष आँखों से जब भी कोई चाहत होती...
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अभिलाषा
जीवन-वृत्त
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[13 Apr 2010 00:47 AM]



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