मनु स्मृति-अपने ऊपर निर्भर काम को ही हाथ में लें (apna hath jagnnath-manu smriti)
यत्कर्मकुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः।तत्प्रयतनेन कुर्वीत विपरीतं तु वर्जयेत्।हिन्दी में भावार्थ-जिस काम को करने से मन और अंतरात्मा को शांति मिलती हो वही करना चाहिए। जिससे इसके विपरीत स्थिति हो तो उस काम को त्याग देना चाहिए। सर्वे परवशं दुःखं...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[12 Apr 2010 23:18 PM]



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