तुम कहां गए

इयत्ता रतनबतलाओ तुम कहां गएबरसों बाद भी तेरी यादेंआती हैं नित शाम-सवेरेजब आती है सुबह सुहानीजब देते दस्तक अंधेरेकोना कोना देखा करतानजर नहीं तुम आते होमन में बसते हो लेकिन क्योंअंखियों से छिप जाते होबतलाओ तुम कहां गए हम जाते हैं खेत गली हरहम जाते हैं नदी... [पूरी पोस्ट]
writer रतन

poetry

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[12 Apr 2010 21:23 PM]

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