संत कबीर दर्शन-गुरु भक्ति के बिना राजा भी गधा (Guru Bhakti ke bina-kabir ke dohe)
तेहि घर किसका चांदना, जिहि घर सतगुरु नाहिं।महात्मा कबीरदास जी कहते हैं कि चौसठ कलाओं और चौदह विद्याओं की जानकारी होने पर पर अगर सत्गुरु का ज्ञान नहीं है तो समझ लीजिये अंधियारे में ही रह रहे हैं। कबीर गुरु की भक्ति बिन, राज ससभ होय।माटी लदै कुम्हार की,...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[12 Apr 2010 20:55 PM]



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