गांधी कथावाचकों को तैयार करने का मन तो है पर योजना नहीं
नारायण देसाई से मिलने की तमन्ना शनिवार को पूरी हो गई। पचासी साल के तेज़ तर्रार और ज़िन्दादिल बुज़ुर्ग से मिलकर अच्छा लगा। बताने लगे कि कैसे गांधी कथा तैयार हो गई। गुजराती में बापू की जीवनी तैयार हो रही थी। साढ़े चार साल में चार खंडों में तेईस सौ पेज का...
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ravish kumar
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[12 Apr 2010 13:30 PM]



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