असली और नकली जांबाज-हिन्दी शायरी

 हिन्द केसरी-पत्रिका मैदान पर लड़ते कम किनारे पर खड़े दिखाते दम कागजी जांबाजो के करतब कभी अंजाम पर नहीं पहुंचे पर हर पल उनको अपनी आस्तीने ऊपर करते हमने देखा है। कीर्तिमान बहुत सुनते हैं उनके पर कामयाबी के नाम पर खाली लेखा है। ———- पत्र प्रारूप पर हाशिए पर नाम... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

अभिव्यक्तिअनुभूतिहिंदी कवितादीपक भारतदीप

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[12 Apr 2010 12:35 PM]

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