कुछ तो बोलो दोस्त...
जैसे कि सबकुछ पहले से तय थाएक- एक पात्र ने जैसे रटा हुआ था...अपना-अपना संवादअपना-अपना किरदारसाफगोई से...पूरे वक्त पर, सबने निभाई थी अपनी जिम्मेदारीपूरे अदद सेअदना-कदना, औने-पौने सबनेहां, सबने तकरीबन छीले थे मेरे ज़ख्मजैसे कि नीयति का साथ देने के लिए...
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archana rajhans
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[12 Apr 2010 13:02 PM]



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