कामयाबी और खौफ-हिन्दी शायरी

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका अपनी कामयाबी भी उनको तब तक हज़म नहीं हो पाती है, जब तक दूसरे की नाकामी की खबर उनके पास न आती है। दुनियां का यही दस्तूर है मूर्खों का भी क्या कसूर है सभी लोगों दूसरे की छोटी लकीर से बड़ी लकीर खींचना नहीं आती है। ——— हर रोज वह कामयाबी के... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिदीपक भारतदीप

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[12 Apr 2010 13:01 PM]

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