कामयाबी और खौफ-हिन्दी शायरी
अपनी कामयाबी भी
उनको तब तक हज़म नहीं हो पाती है,
जब तक दूसरे की नाकामी की खबर
उनके पास न आती है।
दुनियां का यही दस्तूर है
मूर्खों का भी क्या कसूर है
सभी लोगों दूसरे की छोटी लकीर से
बड़ी लकीर खींचना नहीं आती है।
———
हर रोज वह
कामयाबी के...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिदीपक भारतदीप
12
0
0
0
0
[12 Apr 2010 13:01 PM]



Shuffle







