ब्राउनियन मोशन में जीव-सार सारा

उधेड़-बुन झोपड़ी के दीप सा टिमटिमाता ताराभटकता है नभ में ज्यों भटके शिकाराभटकना ही जीव का दीन-ओ-धरम हैब्राउनियन मोशन में जीव-सार साराभटकना न होता तो पाषाण होतेन हिलते, न डुलते, न होते बीच धाराजीवन है जीना तो बहना है निश्चितजीते जी किसी को न मिलता किनारामोक्ष की आस... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

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[12 Apr 2010 12:09 PM]

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