फूल, ख़ुशबू, चाँद, जुगनू और सितारे आ गए
फूल, ख़ुशबू, चाँद, जुगनू और सितारे आ गए खुद-ब-खुद गजलों में अफ़साने तुम्हारे आ गए रूह को आदाब दिल के, थे सिखाने पर तुलेपर उसे तो ज़िस्म वाले सब इशारे आ गए आंसुओं से सींची है, शायद ज़मीं ने ये फसलक्या ताज्जुब पेड़ पर ये फल जो खारे आ गएहमको तब अपनी मुहब्बत...
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श्रद्धा जैन
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[12 Apr 2010 11:58 AM]



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