॥ बित्ता भर पेट के लिए॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : तीन)टूटी-फूटी झोपड़ी का यह हालकि हर तरफ चू रहा है बरसात का पानीखपरैल वाले घर की ऐसी हालतकि जहां-तहां से घुस रहा है बरसात का पानीक्यों छाजन के लिए पहाड़ परनहीं है साउड़ी घासजो हर तरफ चूने लगा है पानी?नदियों में क्या नहीं है...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[12 Apr 2010 11:56 AM]



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