अभिव्यक्ति उत्सव - ब्लॉग जगत में दो माह

Samvedana Ke Swar मैं… जब भी कुछ मह्सूस किया, आदतन उसे सामने पड़े किसी भी काग़ज़ के टुकड़े पर, या अखबार के किसी कोरे हाशिये पर, नज़्म की शक्ल में लिखा, दोहराया, कुछ दिन सम्भाला और फिर कहीं किसी कोने में रखकर भूल गया. लगा जैसे मन की बात को पर लग गये और जज़्बात के परिंदे उड़कर... [पूरी पोस्ट]
writer SAMVEDANA KE SWAR

उत्सव

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[12 Apr 2010 11:44 AM]

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